सोमवार, 17 सितंबर 2018

मिस एडवेंचर्स ऑफ़ तोताराम #2




('तोताराम' और  'इलाइची' मेरे जेहन से निकले दो किरदार हैं। कभी कभी मन के किसी कोने से उभर कर आ जाते हैं और अपनी दुनिया की झलक सी दिखा जाते हैं। यह झलक कुछ पल, कुछ दृश्यों तक रहती हैं। मैं उस झलक को दस्तावेज़ में उकेर लेता हूँ। ये मेरे प्रिय पात्र हैं और मैं नहीं चाहता कि इन्हे लगे कि मैं इन्हे नज़र-अंदाज कर रहा हूँ। यही झलक इधर प्रकाशित की है। उम्मीद है कभी ज्यादा वक्त के लिए ये मुझे अपने साथ ले जाएंगे ताकि इन दोनों के जीवन से जुड़े कई किस्सों को दर्ज कर सकूँ।तब तक के लिए आपको इन टुकड़ों से ही काम चलाना पड़ेगा।)


तोताराम दरवाजे के चौखट के बगल में  दुबक सा रखा था। दरवाजे शीशा का था और उसके आर पार देखा जा सकता था। तोताराम ने दरवाजे के बगल से मुंडी निकालकर दरवाजे के अन्दर झाँका । वैसे आपको या मुझको अभी इन सब बातों का पता नहीं चल सकता था क्योंकि तोताराम अदृशय था। उसे कोई देख नहीं सकता था। वो अदृश्य था लेकिन फिर भी सावधानी बरतने में क्या जाता था।

आखिरकार इतने वर्षो बाद सेना ने अपने सनिकों के लिए ऐसी पोशाक तैयार कर ली थी जिसको पहनकर लोग अदृश्य हो जाते थे। यही नहीं इंसान इन्फ्रारेड से पहचान में न आये इसलिए यह पोशाक वातावरण के हिसाब से उनके बदन के तापमान को भी बदल देता था। पोशाक पहने आदमी के शरीर का तापमान वातावरण के बराबर ही होता जिससे इंफ़्रारेड की पकड़ में वो नहीं आता क्योंकि शरीर कोई गर्मी छोड़ता ही प्रतीत नहीं होता था। इस पोशाक पर सेना का ही नियन्त्रण था। और सेना ही विशेष मिशन के तहत इसे लोगों को देती थी। अगर कभी कोई सैनिक पकड़ा जाता तो उसे हिदायत थी कि खुद को अदृश्य से दृश्य कर सकता था जिसके बाद इस सूट में इस तरह के बदलाव होते कि यह एक आम सूट ही रह जाता।एक बार अदृश्य से दृश्य होने के बाद न वापस बदला जा सकता था और न ही कोई  कितना भी चाहे वो इसमें इस्तेमाल की तकनीक को चुरा सकता था। सैनिकों को यही हिदायत दी जाती कि अगर किसी तरह पकड़े गए तो सूट की तकनीक की सुरक्षा ही उनका पहला कर्तव्य था।

तोताराम यूनाइटेड नेशनस का एक आला कमांडो था। उसे यह फक्र कैसे हासिल हुआ था यह जुदा मसला था। उस पर फिर कभी  आयेंगे। अभी के लिए तो कॉस्टयूम उसे दिया गया था जिसके बदौलत वो इस अन्तरिक्ष यान में दाखिल हो पाया था और अपने मिशन पर लगा हुआ था। तोताराम दरवाजे से अन्दर की चीजों को देखने लगा।

अन्दर एक टेबल लगी हुई थी। टेबल में कुछ खाने पीने का सामान था।  टेबल पर पूरी आकाशगंगा के अपराधी बैठे हुए थे। आपस वो कुछ बातचीत कर रहे थे। इस मीटिंग की अध्यक्ष के रूप में इलाइची बैठी हुई थी। हरे बाल और सांवले चेहरे वाली इलाइची कमाल की सुन्दर लग रही थी। न चाहते हुये भी तोताराम एक ठंडी आह भरकर रह गया। उसने अपने सिर को झटका। पुराने प्रेम के चक्कर में फर्ज से वो मुंह नहीं मोड़ सकता था। यह काम का वक्त था न कि प्रेम  की पींगे बढाने का या उनकी यादों में खोने का।

शनिवार, 15 सितंबर 2018

अपने ब्लॉग पोस्टस को व्यवस्थित कैसे करें?

हम जब भी ब्लॉगर पर पोस्ट लिखते हैं तो हमारा ध्येय यही होता है की वह पोस्ट अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे। यह तब ही मुमकिन है जब पाठक आपके ब्लॉग पर आसानी से विचर सके और अपनी जरूरत और रूचि के अनुसार अलग अलग श्रेणी की पोस्ट पर जा सके। अगर आप यह करना चाहते हैं तो इस काम को लेबल्स के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है।

चूँकि मैं blogger का ही इस्तेमाल करता हूँ तो मैं इसी के विषय में इस पोस्ट में बताऊँगा। वैसे दूसरी ब्लॉग्गिंग साईट में भी यह सुविधा होती है बस थोड़ा टर्म अलग बन जाते हैं।

अगर आप blogger का इस्तेमाल करते हैं तो पोस्ट एडिटर के बगल में एक छोटा सा लेबल्स का बॉक्स आपको दिखता होगा। आखिर ये लेबल्स होते क्या हैं? label ऐसे शब्द या शब्दों के समूह होते हैं जो कि आपकी पोस्ट का विवरण देते हैं। उदाहरण के लिए चूँकि यह पोस्ट blogger के विषय में है और कुछ तकनीक के विषय में है तो इस पोस्ट के  निम्न labels हो सकते हैं:

तकनीक, tech, blogger, label 

यानी वह शब्द जो आपकी पोस्ट को परिभाषित करते हैं उन्हें आप लेबल्स में इस्तेमाल कर सकते हैं। यह पूरी तरह आप पर निर्भर होता है कि आप कौन से लेबल अपनी ब्लॉग पोस्ट को दे रहे हैं। अगर ब्लॉग पोस्ट कई श्रेणियों में आती है तो आप उतने लेबल उसे दे सकते हैं। हाँ, यह ध्यान रखें कि ब्लॉगर में आप केवल 200 करैक्टर के लेबल्स ही दे सकते हैं। अगर सभी लेबल्स के अक्षर 200 से ऊपर होते हैं तो ब्लॉगर त्रुटि दर्शाता है। इसलिए एक पोस्ट के लिए आप अपने लेबल्स इस तरह से रखें कि 200 अक्षरों में आ जाएं।

लेबल्स का सबसे ज्यादा फायदा तब होता है जब आप अलग-अलग तरह की पोस्ट अपने ब्लॉग में करते हैं। उदाहरण के लिए मेरे ब्लॉग में यात्रा-वृत्तांत भी रहता है, तो तकनीक की कुछ पोस्ट भी रहती हैं, थोड़ी मेरी लिखी लघु-कथा भी रहती है , तो कुछ और भी चीजें रहती है। ऐसे में यह जरूरी नहीं कि एक पाठक को सब तरह की जानकारी में दिलचस्पी हो। blogger होने के नाते आपका कर्तव्य रहता है कि पाठक को उसके मतलब की जानकारी आसानी से दे सकें। ऐसे में लेबल्स बड़े काम आते हैं। इनसे आप अपनी पोस्ट को श्रेणीबद्ध कर सकते हैं और एक लिंक के माध्यम से यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उस तरह की हर पोस्ट तक पाठक पहुँच सके।

शनिवार, 8 सितंबर 2018

मोल्ठी #2 :बस्ग्याल तभी मनेलु जब छोया फुट्ला(बरसात तभी मानी जायेगी जब छोया फूटेंगे)

 यह यात्रा 7/9/2018, शुक्रवार  को की गई

पैडुल के ठीक नीचे उतरते हुए

अपने ननिहाल गये हुए काफी वक्त हो चुका था। पिछली बार दो हजार सोलह में अक्टूबर के महीने गया था। यह प्राइवेट नौकरी के श्राप ही है जिसके चलते कहीं भी जाना दुश्वार हो जाता है। जब घर आता था तो दो एक दिन के लिए ही आता था और इसलिए कहीं और जाने का वक्त ही नहीं लगता था। इस बार थोड़ी लम्बी छुट्टियाँ आया तो सोचा कि एक बार ननिहाल भी जाना चाहिए।

उधर दिल्ली से मामा भी आ रखे थे और उन्होंने भी फोन करके आने को बोला था। ऐसे में जाने के दो कारण थे ही। मामा के अच्छा टाइम पास भी हो जाता है। वैसे तो मैं गुडगाँव में ही रहता हूँ लेकिन उनके यहाँ जाने का वक्त भी नहीं लग पाता है। इसलिए मैं जाने के लिए तैयार था।

सुबह उठा। परसों इब्ने सफी का एक उपन्यास बहरूपिया नवाब पढ़ा था तो उसके विषय में एक पोस्ट की और फिर नहा धोकर पौड़ी बस स्टैंड पहुँच गया। नाना जी ने मुझे ब्लीच लाने के लिए कहा था। बरसात से होने वाली परेशानियों में काई भी थी। यह रास्ते में जम जाती है और रास्ते को फिसलने वाला बना देती है। बचपन में मुझे याद है बरसात के दिनों में हम कई बार ऐसे काई वाले रास्तों में फिसलते थे। अक्सर रास्तों के बगल में मौजूद दीवारों में कंडाली(बिच्छू घास) उगी होती थी और हम लोग बचने के लिए दीवार पकड़ते तो गीली कंडाली हाथ पर लग जाती और दोगुना चोट लगती।

अगर आपको कंडाली का अनुभव है तो यकीन मानिए फिसलकर गिरने और गीली कंडाली पकड़ने के बीच अगर आपको कुछ चुनना पड़े तो आप ख़ुशी ख़ुशी फिसलना कबूल करेंगे। हम भी यही करते लेकिन कई बार चीजें स्वचालित रिफ्लेक्स के कारण हो जाती है और फिर जो हाथ का हाल होता।वो  दुश्मन को भी न हो। इतनी चुभन होती है लगता है जैसे कई चीटियों ने काट दिया हो। जहाँ पर कंडाली लगती उधर ऐसे सूज जाता जैसे चींटी के काटने पर होता है। उस जगह को घिसते घिसते हालत बुरी हो जाती और जब तक घर में जाकर हम लोग उस हिस्से पर सरसों का तेल नहीं मल देते तब तक चैन नहीं मिलता। वैसे तो पहाड़ी घरों में कंडाली का प्रयोग उद्दंड बच्चों को ठीक करने के लिए होता है। पर वह अक्सर सूखी कंडाली होती है। गीली होकर उसकी मारकक्षमता कई गुना बढ़ जाती है और घर वाले इतने निर्दयी नहीं होते कि गीली से वार करें।

सोमवार, 3 सितंबर 2018

किंडल के एप्प या ई रीडर में अपने पर्सनल डाक्यूमेंट्स कैसे भेजे

आप माने या न माने किंडल के आने से पढ़ने के तरीके में काफी बदलाव हुआ है। इसके आने से ई बुक का चलन बढ़ा है और मुझे लगता है लोग ज्यादा पढ़ने भी लगे हैं। इसका एक कारण यह भी है कि अब किताब पढ़ना आसान हो गया है। आप एक साथ कई किताब लेकर घूम सकते हैं और जब वक्त मिले फट से निकालकर पढ़ सकते हैं। मैं खुद ऑफिस पैदल जाता हूँ और चलते हुए किंडल के पन्नों को पलटने का शौक रखता हूँ। यही नहीं कहीं घूमने जाना हो तो किंडल को ही ले जाना पसंद करता हूँ क्योंकि एक तो एक बार चार्ज करके यह हफ़्तों तक चल जाता है, दूसरा एक छोटे से स्पेस में काफी किताबें रखी जा सकती हैं। आपका बैग पैक भी भारी नहीं होता और आप आराम से किताबों का आनन्द ले सकते हैं।

मेरा प्यारा किंडल 

किंडल की खुद की लाइब्रेरी में इतना कुछ मौजूद है जिसे पढ़ते पढ़ते आप पूरी ज़िन्दगी गुजार सकते हैं और फिर भी वह  सामग्री कभी खत्म नहीं होगी। किंडल जब तक ई रीडर  पर ही मौजूद था तब तक इसकी पहुँच काफी कम थी लेकिन अब मोबाइल एप्प आने के पश्चात इसकी पहुँच काफी बढ़ चुकी है। अगर आपके पास मोबाइल है तो किंडल में मौजूद सामग्री आप उस पर पढ़ सकते हैं। इससे आँखों में स्ट्रेन जरूर पढ़ सकता है लेकिन छोटे छोटे कहानियाँ इत्यादि  तो पढ़े ही जा सकते हैं।

अगर आप ज्यादा पढ़ने के शौक़ीन हैं तो बेहतर यही होगा कि आप किंडल का ई रीडर ले लें जो कि आँखों के लिए अच्छा रहता है और दूसरा उसमें ध्यान भटकने की सम्भावना काफी कम रहती है क्योंकि उसमें केवल पढ़ा जा सकता है। मैं खुद पढ़ने के लिए ई बुक रीडर का इस्तेमाल करता हूँ।  मेरे पास बेसिक वर्शन ही है जो मेरी जरूरतों को आसानी से पूरा कर देता है।

किंडल के खुद के स्टोर में पढ़ने के लिए काफी कुछ  मौजूद है लेकिन फिर भी  कई बार हमारे पास कुछ ऐसे डाक्यूमेंट्स होते हैं  जिन्हें हम किंडल पर पढ़ना चाहते हैं और वह स्टोर में उपलब्ध नहीं होते हैं। यह आपकी प्रोजेक्ट से जुडी रिपोर्ट हो सकती हैं या कोई नई तकनीक से जुड़ा टुटोरिअल। या फिर ऐसे उपन्यास जो पब्लिक डोमेन में तो फ्री में उपलब्ध हैं लेकिन किंडल स्टोर में नहीं हैं। कारण कुछ भी हो सकता है।

पहले इस काम को मैं किंडल को कंप्यूटर पर कनेक्ट करके कर सकता था। लेकिन अगर आप कंप्यूटर से कनेक्ट न करना चाहे तो किंडल ने इसका भी इंतजाम किया हुआ है। आप उस डॉक्यूमेंट को मेल कर सकते हैं और वो डॉक्यूमेंट आपके किंडल में व्हिस्परसिंक के माध्यम से आ जायेगा। यह एक आसान तरीका जो मुझे सुहाता भी है।
आपको बस उस ईमेल का पता लगाना है जिसपर आपको मेल भेजना है। यह आप फोन, किंडल ई रीडर , और साईट के माध्यम से निम्न तरीके से कर सकते हैं।